Neeraj Agarwal

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लेखनी कहानी -01-Feb-2024

शीर्षक - मोबाइल की लत


मोबाइल की लत कहानी का शीर्षक की हम सबको समझ में आता है कि किसी चीज की आदत होना यह भी एक अच्छा या बुरा हो सकता है परंतु आजकल की आधुनिक युग में मोबाइल की लत तो शायद हर किसी को लग चुकी है और हम सभी इस सच को समझते है। मोबाइल की लत राजन और अनीता दोनों कॉलेज के एक होनहार पढ़ने वाले विद्यार्थी हैं। और दोनों ही मोबाइल की लत के शिकार या यूं कहीं की मोबाइल की लत ऐसी लगी हुई है कि वह नहाने के समय में भी मोबाइल को नहीं छोड़ते हैं अब आप कहेंगे कि नहाने के समय मोबाइल कैसे प्रयोग कर सकते हैं उनकी लत इतनी हद तक बढ़ चुकी है कि वह नहाने के समय में भी मोबाइल को मोबाइल के स्टैंड पर कसकर उसने टिक टॉक वीडियो या वीडियो कॉलिंग के साथ लगे रहते हैं क्योंकि आधुनिक युग में हम अपना शरीर अपना अस्तित्व न जाने क्या-क्या हम दिखाई जा रहे हैं परंतु हम तो मोबाइल की लत में अपने जीवन और दिमाग सभी को खोते जा रहे हैं। एक सच और कड़वा सच है हम सभी मोबाइल के अंदर कैद हो चुकी है मोबाइल की लत हमें इस कदर लग चुकी है जो हम कहानी को पढ़ रहे हैं या लिख रहे हैं वह भी मोबाइल के लत के साथ ही जुड़ी है हां सच में आप से ही कह रहा हूं। मोबाइल की लत या मोबाइल की जरूरत दोनों में बहुत अंतर है क्योंकि मोबाइल की लत एक जबरदस्ती और मोबाइल को हर समय प्रयोग करते रहना यह मोबाइल की लत है और समय-समय पर मोबाइल का उपयोग करना यह मोबाइल की जरूरत है परंतु राजन और अनीता को मोबाइल की लत लग चुकी थी बिना मोबाइल के उनका जीवन एक पल भी नहीं चलता था मोबाइल की लत के साथ-साथ वह दोनों एक दूसरे को बात भी मोबाइल पर ही करते थे भला ही वह दोनों साथ-साथ हूं फिर भी उनकी बात मोबाइल पर ही होती थी अब आप कहानी के किरदार के साथ स्वयं को सोच सकते हैं कि मोबाइल की लत कहां तक उचित और अनुचित है राजन के हाथों में दर्द रहने लगा और वह अनीता से कहता है कि मेरे हाथों में बहुत दर्द रहता है अब मोबाइल मुझे चलाया नहीं जाता यह सुन अनीता को बहुत बुरा लगा और वह कहती है तुम तो अभी से बूढ़े हो गए हो और कुछ दिनों बाद राजन डॉक्टर को अपना हाथ दिखता है तब डॉक्टर कहता है आपकी उंगलियों की नसें जाम हो गई है तब राजन पूछता है डाक्टर साहब इसका इलाज क्या है। तब डॉक्टर साहब कहते हैं मोबाइल की लत को छोड़ना या जितनी देर रात चलते हैं उसका 10 प्रतिशत ही प्रयोग करना। कुछ दिनों बाद मोबाइल की लत के साथ साथ अनीता को चक्कर आना और आंखों में दर्द रहने लगता हैं। वह भी डॉक्टर के सलाह लेती हैं तब डॉक्टर कहता हैं कि आंखों का आपरेशन करना होंगा। सच और कल्पना के साथ यह मोबाइल की लत कहानी के रूप में एक सच और वास्तविक घटना का विवरण पढ़ रहे हैं। हम सभी कहानी को एक सामाजिक संदेश के रूप में लिखते हैं मोबाइल की लत इस कदर पड़ चुकी है हम इसे छोड़ नहीं सकते परंतु हम कम जरुर कर सकते हैं। राजन और अनीता ने अपने जीवन के लिए मोबाइल की लत को काम कर दिया वह जब 24 घंटे मोबाइल की लत थी अब उन्होंने जीवन जीने के लिए 25% मोबाइल की लत कर दी और वह सुकून और सही जीवन जीने लगे आओ हम सब भी मोबाइल की लत को कम करते हैं और समय अनुसार मोबाइल का प्रयोग करते हैं और मोबाइल की लत छोड़कर मोबाइल को जरूरत के समय उपयोग करते हैं। राजन और अनीता की डॉक्टर ने परेशानी दूर करी परंतु कभी-कभी परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि वह है ला इलाज बन जाती है मोबाइल की लत हम सभी को होती है परंतु हम कहानी के साथ-साथ एक संदेश अभिप्रेरणा के साथ मन भाव में निश्चय कर सकते हैं। और अपने जीवन से मोबाइल की लत को मोबाइल की जरूरत बना सकते हैं। मोबाइल की लत हम छोड़ सकते हैं।

नीरज अग्रवाल चंदौसी उ.प्र

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4 Comments

Gunjan Kamal

02-Feb-2024 03:44 PM

👏👌

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Mohammed urooj khan

02-Feb-2024 01:17 PM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Varsha_Upadhyay

02-Feb-2024 12:28 PM

Nice one

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